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दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो द्विपक्षीय वार्ता के लिए जाएंगे तुर्की और बेल्जियम

सोल, 20 जनवरी (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून इस हफ्ते तुर्की और बेल्जियम का दौरा करेंगे। यहां द्विपक्षीय बातचीत के अलावा वे यूरोपियन यूनियन के साथ रणनीतिक वार्ता में भाग लेंगे। मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी।

मंत्रालय ने बताया कि उनकी चार दिवसीय यात्रा तुर्की से शुरू होगी, जहां बुधवार (स्थानीय समय) को वह तुर्की के अपने समकक्ष हाकान फिदान के साथ बातचीत करेंगे।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उप विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ली मून-बे ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह आगामी बातचीत पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की देश की राजकीय यात्रा के बाद एक फॉलो-अप है।

ली ने कहा, “(मंत्री) परमाणु ऊर्जा, रक्षा उद्योग, बायो और इंफ्रास्ट्रक्चर सहित प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं में हुई प्रगति पर चर्चा करेंगे।”

इसके बाद चो बेल्जियम जाएंगे और गुरुवार को यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास के साथ दूसरी रणनीतिक सुरक्षा वार्ता करेंगे।

दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ ने 2010 में सुरक्षा, रक्षा और अर्थव्यवस्था से लेकर व्यापार और विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक सहयोग को गहरा करने के लिए संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” तक बढ़ाया। दोनों पक्षों ने 2024 के अंत में रणनीतिक संवाद शुरू किया।

ली ने आगे कहा, “दोनों मंत्री दक्षिण कोरिया-यूरोपीय संघ संबंधों पर व्यापक चर्चा करेंगे और कोरियाई प्रायद्वीप और यूक्रेन में युद्ध सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।”

ब्रसेल्स में रहते हुए, चो बेल्जियम के उप प्रधान मंत्री और श्रम, अर्थव्यवस्था और कृषि मंत्री डेविड क्लारिनवाल के साथ द्विपक्षीय बातचीत करने की भी योजना बना रहे हैं।

2 जनवरी को, ह्यून ने बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बीच दक्षिण कोरिया की विदेश नीति के विस्तार का संकल्प लिया था।

चो ने अपने भाषण में कहा, “जिन मिशनों का प्रभाव सीमित है, उनके लिए हम कुशल पुनर्गठन करेंगे और उन्हें प्रमुख मिशनों पर ध्यान केंद्रित करके मजबूत करेंगे।”

उनकी यह टिप्पणी मीडिया रिपोर्टों के बाद आई थी जिसमें साफ किया गया था कि मंत्रालय ने कई देशों में नए दूतावास खोलने की योजनाओं को रद्द कर दिया है। दरअसल, राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने विस्तार की आवश्यकता पर सवाल उठाया था।

 

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