Home अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का बढ़ा दायरा, फिर भी आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का बढ़ा दायरा, फिर भी आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं

संयुक्त राष्ट्र, 09 अक्टूबर (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बताया क‍ि संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल कम्युनिकेशंस विभाग (यूएनडीजीसी) की ओर से हिंदी के इस्तेमाल को भारत के स्वैच्छिक सहयोग से समर्थन मिलने के बावजूद हिंदी का दर्जा अब भी संयुक्त राष्ट्र में गैर-आधिकारिक भाषा का ही बना हुआ है।

उन्होंने गुरुवार को हिंदी दिवस कार्यक्रम के दौरान कहा, “हाल ही में पारित बहुभाषावाद प्रस्ताव में हिंदी का गैर-आधिकारिक भाषा का दर्जा बरकरार रखा गया है। इसका कारण यह है कि यूएन का वैश्विक संचार विभाग हिंदी में समाचार और सोशल मीडिया सामग्री प्रसारित कर रहा है।”

हरीश ने कहा, “भारत स्वेच्छा से ‘हिंदी एट यूएन’ परियोजना का समर्थन कर रहा है, जिसके जरिए दुनिया भर के हिंदी भाषी लोगों तक संयुक्त राष्ट्र की खबरें और जानकारी हिंदी में पहुंचाई जाती हैं।”

उन्होंने बताया कि पिछले महीने महासभा की ओर से पारित और अंडोरा के सहयोग से पेश किए गए बहुभाषावाद प्रस्ताव में गैर-आधिकारिक भाषाओं के सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व को मान्यता दी गई है। इसमें यह भी दोहराया गया है कि कोई भी प्रतिनिधि गैर-आधिकारिक भाषाओं में अपना वक्तव्य दे सकता है।

हरीश ने कहा कि भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद का समर्थन करता रहा है और इस विषय से जुड़े प्रस्तावों का सह-प्रायोजक भी रहा है।

उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा, “भाषा का सबसे बड़ा महत्व तब होता है, जब वह लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का काम करे न कि उन्हें बांटे।”

उन्होंने कहा कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसका प्रभाव भारत की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। हिंदी आज दुनिया भर में भारत के विचारों, कहानियों और सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।

हरीश ने कहा, “भारतीय प्रवासी समुदाय, साहित्य, सिनेमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।”

बहुभाषावाद प्रस्ताव को प्रायोजित करने वाले अंडोरा के स्थायी प्रतिनिधि जोआन फोर्नेर रोविरा ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पहला अनुच्छेद हमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मानवाधिकारों और मूलभूत स्वतंत्रताओं के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।”

उन्होंने कहा कि भाषा इस लक्ष्य को हासिल करने का एक अहम माध्यम है। रोविरा ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र के भीतर भाषा कूटनीति के सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक है।”

भाजपा सांसद सीपी जोशी ने कहा, “आज हिंदी भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है।”

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में यूएनडीजीसी और भारत के बीच एक समझौता (एमओयू) हुआ था, जिसके तहत नई दिल्ली के स्वैच्छिक योगदान से संयुक्त राष्ट्र की खबरें हिंदी में प्रसारित की जाती हैं। जोशी ने कहा कि पिछले वर्ष इस समझौते को पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया।

उन्होंने कहा, “भारत एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक सभ्यता है। देश की सभी भाषाएं और बोलियां हमारी साझा विरासत का हिस्सा हैं।”

जोशी ने कहा कि हिंदी इस समृद्ध भाषाई परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और दुनिया की सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में शामिल है।

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