Home अंतरराष्ट्रीय अमेरिका को सिर्फ बेहतरीन विदेशी टैलेंट चाहिए : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

अमेरिका को सिर्फ बेहतरीन विदेशी टैलेंट चाहिए : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

वॉशिंगटन, 09 अक्टूबर (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने गुरुवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन एलन मस्क जैसे असाधारण विदेशी टैलेंट को आकर्षित करना चाहता है, लेकिन वह ऐसे इमिग्रेशन प्रोग्राम का इस्तेमाल नहीं होने देगा जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशों से कम वेतन वाले कर्मचारियों को रखा जाए।

वेंस ने कहा कि अमेरिका असाधारण कौशल और काबिलियत वाले विदेशियों का स्वागत करता रहेगा, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एच-1बी वीजा प्रोग्राम अपने मूल मकसद से भटक गया है।

वीजा धोखाधड़ी पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि अगर लोगों के पास सच में बेहतरीन और खास हुनर है, तो वे अमेरिका आएं।”

उनकी यह बात मस्क के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आई, जिन्होंने अपना बिजनेस साम्राज्य खड़ा करने से पहले अमेरिका में पढ़ाई की थी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था।

एक पत्रकार ने पूछा कि प्रशासन विदेशी कामगारों और शोधकर्ताओं के लिए मौके सीमित करते हुए अगले मस्क की पहचान कैसे कर सकता है। वेंस ने कहा कि विदेशी पेशेवरों पर विचार करते समय आव्रजन अधिकारियों को दो टेस्ट करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहला टेस्ट यह था कि क्या आवेदक ऐसी जगह भरेगा जिसे कोई अमेरिकी कामगार नहीं भर सकता। दूसरा यह था कि क्या उस व्यक्ति में असाधारण काबिलियत है।

उन्होंने पूछा, “क्या वे सच में कोई खास हुनर, काबिलियत, काम करने का अच्छा तरीका और क्षमता लेकर आ रहे हैं?”

वेंस ने कहा कि प्रशासन अमेरिकी इनोवेशन और आर्थिक विकास में विदेशी पेशेवरों के योगदान के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने मस्क और एएमडी की चीफ एग्जीक्यूटिव लिसा सु का उदाहरण दिया, जिनके योगदान ने असाधारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा की अहमियत को दिखाया।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई नियोक्ता आव्रजन प्रोग्राम का इस्तेमाल ऐसे कामों के लिए विदेशी कामगारों को भर्ती करने में कर रहे हैं जिन्हें अमेरिकी कर सकते हैं।

वेंस ने कहा, “दुर्भाग्य से, ज्यादातर एच-1बी मामलों में हम देखते हैं कि आप किसी व्यक्ति को ले रहे हैं। मुझे यकीन है कि ज्यादातर मामलों में वे अच्छे इंसान होते हैं और उनका इस्तेमाल किसी अमेरिकी मिडिल क्लास कामगार की जगह लेने के लिए किया जा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने एच-1बी आवेदनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रशासन के फैसले का भी बचाव किया।

उन्होंने कहा कि जो कंपनियां सच में असाधारण कामगार चाहती हैं, उन्हें उन्हें भर्ती करने के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार रहना चाहिए।

वेंस ने आगे कहा, “अगर आप सच में किसी बेहतरीन, जीनियस-लेवल, सुपर-स्पेशलाइज़्ड व्यक्ति को अमेरिका ला रहे हैं, तो आप उस व्यक्ति को अपनी कंपनी में लाने के लिए थोड़ा ज्यादा पैसा देने को तैयार होंगे।”

उन्होंने कहा कि ज्यादा लागत उन नियोक्ताओं को हतोत्साहित करेगी जो मुख्य रूप से वेतन कम करने के लिए विदेशी कामगारों को रखना चाहते हैं। एच-1बी प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक रिसर्च जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी प्रोफेशनल्स को काम पर रखने की इजाजत देता है। नियोक्ताओं को जरूरी योग्यता और वेतन की शर्तों को पूरा करना होता है।

यह प्रोग्राम भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि एच-1बी वीजा पाने वालों में उनकी हिस्सेदारी हमेशा से बड़ी रही है। इसलिए योग्यता और भर्ती को लेकर प्रशासन के नजरिए में बदलाव का अमेरिका में नौकरी चाहने वाले भारतीय टेक्नोलॉजी वर्करों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

 

 

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