Home लेख वायुसेना को बेमिसाल ताकत देगी एस-400
लेख - November 23, 2021

वायुसेना को बेमिसाल ताकत देगी एस-400

-योगेश कुमार गोयल-

-: ऐजेंसी अशोक एक्सप्रेस :-

चीन द्वारा लगाए जा रहे अड़ंगे और प्रतिबंधित करने की अमेरिकी धमकियों के बावजूद आखिरकार रूस से भारत को सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणाली की सप्लाई शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब तीन वर्ष पहले हुई शिखर बैठक के दौरान वायुसेना को ताकत प्रदान करने के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर में एस-400 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल रक्षा प्रणाली की पांच इकाइयां खरीदने का करार हुआ था और इस एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल रक्षा प्रणाली की दो यूनिट 2021 के अंत तक भारत को मिलनी तय हुई थी। इस रक्षा सौदे को देश के रक्षा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत माना गया था। हालांकि चीन नहीं चाहता था कि रूस भारत को एस-400 सहित अन्य रक्षा सौदों की शीघ्र आपूर्ति करे लेकिन यह सरकार के गंभीर प्रयासों का ही असर है कि एस-400 मिसाइल प्रणाली की सप्लाई समय से होनी शुरू हो गई है।

मल्टीफंक्शन रडार से लैस दुश्मन की बर्बादी का ब्रह्मास्त्र मानी जाने वाली एस-400 दुनियाभर में सर्वाधिक उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक है, जो रूसी सेना में 2007 में सम्मिलित हुई थी। चीन, पाकिस्तान तथा अन्य दुश्मन पड़ोसी देशों से निपटने के लिए भारत को इस रक्षा प्रणाली की सख्त जरूरत भी है। भारत हथियार और रक्षा उपकरण सबसे ज्यादा रूस से ही खरीदता रहा है। करीब 58 फीसदी रक्षा सौदे भारत रूस के साथ ही करता है। हथियारों के उत्पादन की भारत की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम में भी रूस भारत का बहुत बड़ा मददगार साबित हो रहा है। मेक इन इंडिया सैन्य प्रोजेक्ट के तहत रूस के पास 12 अरब डॉलर की परियोजनाएं हैं। इसके अलावा सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 25 अरब डॉलर के हथियारों की खरीद और होने के आसार हैं।

भारत-रूस के बीच हथियारों के संयुक्त उत्पादन तथा तकनीक के हस्तांतरण में ब्रह्मोस मिसाइल सबसे महत्वपूर्ण है। रूस से 18 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के लिए पांच हजार करोड़ रुपये तथा 200 कामोव-226टी यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों के लिए 3600 करोड़ रुपये का सौदा है, जिनका एचएएल में रूस के सहयोग से उत्पादन हो रहा है। अमेठी में 7.5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों के निर्माण के लिए भी रूस से 12 हजार करोड़ का करार हुआ है। भारतीय नौसेना भी रूसी सहयोग से निर्मित छह युद्धपोतों आईएनएस तलवार, त्रिशूल, ताबर, तेग, तरकश और त्रिकांड का संचालन कर रही है। इनके अलावा भी भारत में रूस के सहयोग से कई और प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

जहां तक एस-400 मिसाइल प्रणाली की विशेषताओं की बात है तो यह ऐसी प्रणाली है, जिसके रडार में आने के बाद दुश्मन का बच पाना असंभव हो जाता है। इसके हमले के सामने भागना तो दूर, संभलना भी मुश्किल होता है। कुछ रक्षा विशेषज्ञ इसे जमीन पर तैनात ऐसी आर्मी भी कहते हैं, जो पलक झपकते ही सैकड़ों फीट ऊपर आसमान में ही दुश्मनों की कब्र बना सकती है। कहा जा रहा है कि भारतीय वायुसेना में एस-400 के शामिल होने के बाद भारत जमीन की लड़ाई भी आसमान से ही लड़ने में सक्षम हो जाएगा। यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम तीन तरह के अलग-अलग मिसाइल दाग सकता है और इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आसानी से पहुंचाया जा सकता है। यही नहीं, नौसेना के मोबाइल प्लेटफॉर्म से भी इसे दागा जा सकता है। एस-400 में मिसाइल दागने की क्षमता पहले से ढ़ाई गुना ज्यादा है। यह कम दूरी से लेकर लंबी दूरी तक मंडरा रहे किसी भी एरियल टारगेट को पलक झपकते ही हवा में ही नष्ट कर सकती है। यह मिसाइल प्रणाली पहले अपने टारगेट को स्पॉट कर उसे पहचानती है, उसके बाद मिसाइल सिस्टम उसे मॉनीटर करना शुरू कर देता है और उसकी लोकेशन ट्रैक करता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस मिसाइल प्रणाली को अगर आसमान में फुटबॉल के आकार की भी कोई चीज मंडराती हुई दिखाई दे तो यह उसे भी डिटेक्ट कर नष्ट कर सकती है।

एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की विशेषता इसी से समझ सकते हैं कि अमेरिका के एफ-35 जैसे सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट भी इसके हमले से बच नहीं सकते। चीन रूस से यह मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने वाला पहला देश था। यह प्रणाली जमीन से मिसाइल दागकर हवा में ही दुश्मन की ओर से आ रही मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है। यह एक साथ 36 लक्ष्यों और दो लॉन्चरों से आने वाली मिसाइलों पर निशाना साध सकती है और 17 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक अपने लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसे मात्र पांच मिनट में ही युद्ध के लिए तैयार किया जा सकता है। 600 किलोमीटर की दूरी तक निगरानी करने की क्षमता से लैस एस-400 की मदद से भारत के लिए पाकिस्तान के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना भी संभव हो सकेगा। यह किसी भी प्रकार के विमान, ड्रोन, बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइल तथा जमीनी ठिकानों को 400 किलोमीटर की दूरी तक ध्वस्त करने में सक्षम है। इसके जरिये भारतीय वायुसेना देश के लिए खतरा बनने वाली मिसाइलों की पहचान कर उन्हें हवा में ही नष्ट कर सकेगी। भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहे धूर्त पड़ोसी देश चीन ने रूस से 2014 में ही एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीद ली थी। यही कारण है कि 3488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के मद्देनजर हमारे लिए भी यह रक्षा प्रणाली हासिल करना और अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हुए वायुसेना की ताकत बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

अदाणी समूह मुजफ्फरपुर में करेगी बड़ा निवेश, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

पटना, 28 जून (ऐजेंसी/अशोक एक्सप्रेस)। देश के सबसे बड़े रईश गौतम अदाणी की कंपनी बिहार की औद…