Home देश-दुनिया मातृभाषा की रक्षा के लिए अभिभावकों को खुद सामने आना पड़ेगाः हामिद अंसारी

मातृभाषा की रक्षा के लिए अभिभावकों को खुद सामने आना पड़ेगाः हामिद अंसारी

– उर्दू पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने पर इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में समारोह

नई दिल्ली, 30 मार्च (ऐजेंसी/अशोक एक्सप्रेस)। पूर्व उप राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि मातृभाषा की रक्षा के लिए अभिभावकों को खुद सामने आना पड़ेगा और अपने बच्चों को इसकी शिक्षा देने के लिए बंदोबस्त करना पड़ेगा। सरकारों पर आरोप लगाने से मातृभाषा की रक्षा नहीं हो सकती है बल्कि हमें खुद इसकी रक्षा करने का संकल्प लेना होगा।

डॉ. हामिद अंसारी उर्दू पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हम यहां पर उर्दू पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने पर जश्न मना रहे हैं। इस मौके पर उर्दू भाषा और उसके साथ होने वाले भेदभाव की भी बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उर्दू भाषा फली-फूली मगर वहां पर प्राइमरी, मिडिल और सेकेंडरी तक उर्दू माध्यम स्कूल नहीं होने की वजह से वहां पर उर्दू धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक 10 साल पर होने वाली जनगणना में भी मातृभाषा उर्दू को जानने वालों का प्रतिशत दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है जो कि चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा को बचाने के लिए हमें खुद सामने आना होगा और इसके लिए अपने बच्चों को इसकी शिक्षा की व्यवस्था खुद करनी पड़ेगी। उन्होंने इस बात पर खुशी का जाहिर की कि देश के कई राज्यों के साथ दुनिया के अन्य देशों में उर्दू भाषा काफी फल-फूल रही है और वहां पर उसे काफी सराहा जा रहा है।

इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी उर्दू को रोजी-रोटी से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि जब तक हम उर्दू को उसका उचित हक नहीं देंगे तब तक इसका विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्री पद पर रहते हुए उर्दू के समाचार पत्रों के लिए विज्ञापन आदि की विशेष व्यवस्था की थी जोकि उसका जायज हक था।

पूर्व सांसद मीम अफजल ने इस मौके पर कहा कि उर्दू भाषा के विकास और उत्थान के लिए अब हमें इस बात पर जोर देना चाहिए कि स्कूलों में उर्दू विषय के तौर पर पढ़ाने की परंपरा की शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब उर्दू माध्यम स्कूलों पर अधिक जोर नहीं देना चाहिए। पहले हम लोग उर्दू माध्यम स्कूलों पर अधिक जोर दे रहे थे लेकिन अब उर्दू विषय के तौर पर पढ़ाए जाने पर बल देने से उर्दू भाषा को अधिक प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार मासूम मुरादाबादी ने मंच का संचालन किया और इस सम्मेलन के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी है।

 

 

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