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व्यापार - April 15, 2026

यूपीआई ने पिछले साल 228 अरब लेनदेन का आंकड़ा पार किया: रिपोर्ट

मुंबई, 15 अप्रैल (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। भुगतान सेवाओं में अग्रणी वैश्विक कंपनी वर्ल्डलाइन ने मंगलवार को कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान के वातावरण में अब परिपक्वता आ चुकी है और साल 2025 में इसका आंकड़ा 228 अरब लेनदेन का पार गया।

वर्ल्डलाइन की वार्षिक रिपोर्ट “इंडिया डिजिटल पेमेंट्स रिपोर्ट – ईयर 2025 इन रिव्यू” में कहा गया है कि अब देश में यूपीआई, कार्ड्स और भारत बिलपे जैसे भुगतान प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के पूरक रूप में काम कर रहे हैं। इससे पूरी तरह डिजिटल और सातों दिन चौबीसों घंटे चलने वाली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई के जरिये साल 2025 में 228.5 अरब लेनदेन किये गये जो साल-दर-साल 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इन लेनदेन का कुल मूल्य 299.74 लाख करोड़ रुपये रहा। अब रोजाना होने वाले अधिकांश लेनदेन इसी प्लेटफॉर्म पर हो रहा है।

वर्ल्डलाइन के अनुसार, भारत धीरे-धीरे छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन वाली अर्थव्यवस्था बन रहा है। छोटे-छोटे लेनदेन अब नकद की जगह डिजिटल माध्यमों से हो रहे हैं – चाहे वह स्थानीय दुकानों, परिवहन या रोजमर्रा की सेवाओं में हो। यह इस बात से स्पष्ट है कि यूपीआई लेनदेन का औसत मूल्य नौ प्रतिशत घटकर पिछले साल 1,314 रुपये रह गया। वहीं, दुकानदारों को खरीद के बदले भुगतान का औसत मूल्य घटकर 592 रुपये रहा गया है।

साथ ही यह भी तथ्य सामने आया है कि यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या 15 प्रतिशत बढ़कर अब 73.14 करोड़ पर पहुंच गई है। पीओएस टर्मिनल्स (दुकानों पर उपलब्ध मशीनों की संख्या) में भी 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इनकी संख्या 1.15 करोड़ तक पहुंच गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अब लोग कार्ड का ज्यादातर इस्तेमाल अधिक मूल्य और ऑनलाइन भुगतान के लिए करते हैं। पिछले साल क्रेडिट कार्ड से लेनदेन की संख्या 27 प्रतिशत बढ़कर 5.69 अरब पर पहुंच गई। दूसरी तरफ, डेबिट कार्ड लेनदेन में 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान का मूल्य 14.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

भारत बिलपे पर लेनदेन की संख्या साल 2025 में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तीन अरब पांच करोड़ हो गई। इसके मूल्य में 93 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और यह 14.84 लाख करोड़ रुपये रही। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षण संस्थानों के शुल्क, बीमा, ईएमआई और सब्सक्रिप्शन जैसी श्रेणियों में भुगतान बढ़ा है।

वर्ल्डलाइन इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश नरसिम्हन ने कहा, “देश का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम अब एक नये परिपक्व चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां पैमाने के साथ संरचना भी विकसित हो रही है। यूपीआई, कार्ड्स और आवर्ती भुगतान प्लेटफॉर्म की स्पष्ट भूमिकाएं सामने आ रही हैं, जिन्हें तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे का समर्थन मिल रहा है।”

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