Home देश-दुनिया एनएसए अजीत डोभाल का रियाद दौरा, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता पर सऊदी नेतृत्व के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता

एनएसए अजीत डोभाल का रियाद दौरा, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता पर सऊदी नेतृत्व के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता

-पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति का बड़ा संदेश

रियाद, 20 अप्रैल (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का एक महत्वपूर्ण दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। डोभाल का स्वागत भारतीय राजदूत डॉ. सुहेल खान और सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-साती ने किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच आपसी हितों की रक्षा करने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और सऊदी अरब की यह बढ़ती रणनीतिक निकटता वैश्विक कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डोभाल ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसाइद अल-ऐबान के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिरता रहा। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर मंडराते खतरे को देखते हुए, भारत ने सऊदी अरब के साथ मिलकर तेल के प्रवाह को सुचारू बनाए रखने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और समुद्री नाकेबंदी के कारण क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीति का पक्ष लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, डोभाल का रियाद मिशन न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है, बल्कि खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। भारत अपनी इस सक्रिय कूटनीति के माध्यम से यह स्पष्ट कर रहा है कि वह मध्य-पूर्व में स्थिरता स्थापित करने में एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में खड़ा है।

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