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लेख - September 29, 2021

पाक आर्थिकी और तालिबान

-डा. वरिंदर भाटिया-

-: ऐजेंसी अशोक एक्सप्रेस :-

ताजातरीन आर्थिक रिपोर्टो के मुताबिक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से पाक में महंगाई अपने चरम पर पहुंच सकती है और बैलेंस ऑफ पेमेंट पर भी काफी असर पड़ेगा। पाक वित्त मंत्रालय का कहना है कि इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू मुद्रास्फीति के साथ-साथ पेमेंट बैलेंस पर दबाव बना सकती है। पाकिस्तान की मुद्रास्फीति दर मुख्य रूप से वर्तमान और पिछली वित्तीय और मौद्रिक नीतियों, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों, यूएसडी एक्सचेंज रेट व मौसमी कारकों पर निर्भर करती है। बैलेंस ऑफ पेमेंट्स के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2021 में वस्तुओं और सेवाओं का आयात करीब छह अरब डॉलर पर पहुंचने की उम्मीद है। पाक से जुड़ी द न्यूज इंटरनेशनल के अनुसार आयात के विपरीत वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात, आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर जून से सितंबर के दौरान नकारात्मक मौसम का अनुभव होता है।

पाक मीडिया के अनुसार पाकिस्तान में मुद्रास्फीति ने देश में खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिससे निम्न.मध्यम आय वाले परिवारों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान जैसे देश में, जहां अधिकांश परिवार अपनी आधी से ज्यादा कमाई खाने पर खर्च करते हैं, परिवहन, पेट्रोल, बिजली और अप्रत्यक्ष करों की बढ़ती लागत ने भूख, गरीबी और कुपोषण बढ़ने की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जबकि फूड प्राइस इंडेक्स, जिसमें पांच कमोडिटी ग्रुप प्राइस इंडेक्स शामिल हैं, अनाज, वनस्पति तेल, चीनी, मांस और डेयरी, पाकिस्तान के लिए और ज्यादा कठिन समय की ओर इशारा करते हैं क्योंकि ये दर्शाता है कि वैश्विक खाद्य कीमतें जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 31 प्रतिशत ज्यादा थीं। लेकिन निम्न मध्यम आय वाले परिवारों की परेशानियों पर इस्लामाबाद के उदासीन दृष्टिकोण, जो पहले से ही परचेसिंग पावर में भारी कमी और नौकरियों के नुकसान से जूझ रहे लोगों के दुख को और बढ़ा दिया है। वर्ल्ड बैंक के अनुमान के अनुसार पाकिस्तान में गरीबी 2020 में 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई है, क्योंकि दो मिलियन से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तानी रुपया लगातार अपनी चमक खोता जा रहा है।

इस साल जनवरी में एक डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए की कीमत 159.6 पाकिस्तानी रुपए था। इसका वर्तमान मूल्य 170.06 रुपए प्रति डॉलर के आसपास है। जब अगस्त 2018 में प्रधानमंत्री इमरान खान ने पदभार ग्रहण किया था तो पाकिस्तानी रुपए का मूल्य लगभग 121.122 प्रति डॉलर था। स्पष्ट रूप से जब से खान ने पदभार संभाला है, मुद्रा में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। मुद्रा के अवमूल्यन से कर्ज के बोझ पर और दबाव पड़ेगा क्योंकि आयात महंगा हो जाएगा और यह तब है जब देश के खाद्य आयात में काफी वृद्धि हुई है। स्वाभाविक रूप से, सबसे बुरी तरह देश की गरीब आबादी प्रभावित है। भले ही पाकिस्तान प्रशासन अफगानिस्तान में तालिबान की सहायता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, मगर साथ ही उसकी खुद की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। 2020-21 में पाकिस्तान का खाद्य व्यापार घाटा 3.954 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो 2019-20 में 81.7 करोड़ डॉलर था। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में देश को खाद्य वस्तुओं के आयात पर 8 अरब डॉलर से अधिक खर्च करना पड़ा था। गेहूं, चीनी, दालें और अन्य कई जरूरी खाद्य बाहर से पाक में आयात की जाने वाली मुख्य वस्तुएं हैं। कई विश्लेषकों ने यहां तक कहा कि खाद्य आयात में और वृद्धि हो सकती है क्योंकि अफगानिस्तान से शरणार्थियों की आमद हो सकती है। पाकिस्तान के साथ समस्या यह है कि वह अर्थव्यवस्था के अलावा अन्य गतिविधियों पर केंद्रित रहा है। देश के लिए प्राथमिकताएं उसकी सीमाओं के बाहर की गतिविधियां हैं और यह दुखद कहानी है। पाकिस्तान स्थित द न्यूज इंटरनेशनल ने कहा है की हालांकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था शायद ही कभी स्थिर आधार पर रही हो, पिछले तीन वर्षों से हम ज्यादातर समय रोलरकोस्टर की सवारी पर रहे हैं।

विनिमय दर में उतार-चढ़ाव हो रहा है और अब अमेरिकी डॉलर 167 रुपए के निशान को छू रहा है जो 2018 के बाद से पाक मुद्रा का काफी मूल्यहृास दिखा रहा है। 2018 के बाद से देश का कुल कर्ज भी 149 खरब रुपए बढ़ा है। यह और भी विडंबनापूर्ण है क्योंकि खान द्वारा किए गए मुख्य वादों में से एक कर्ज कम करना था। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून तक सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 39.9 लाख करोड़ रुपए हो गया है जिसमें महज तीन साल में 14.9 लाख करोड़ रुपए का इजाफा है। हालांकि देश को पिछले महीने के अंत में अपने विशेष आहरण अधिकारों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 2.5 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं और विश्लेषकों का कहना है कि इससे खान सरकार को कुछ जरूरी राहत मिलेगी। अफगानिस्तान की सेना में एंट्री के साथ-साथ खुफिया जानकारी प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान अब वहां की अर्थव्यवस्था को अपने कंट्रोल में करना चाहता है। पाक ने तालिबान के साथ पाकिस्तानी रुपए में द्विपक्षीय व्यापार करने का ऐलान किया है। यह भी कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान के पास डॉलर्स की भारी कमी है, इसलिए पाकिस्तान अपनी मुद्रा में ही व्यापार करेगा। दरअसल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत कई इंटरनेशनल संस्थाओं ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली फंडिंग पर रोक लगा दी है और उसकी संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया है। ऐसे में अफगान पर कब्जा कर सरकार बनाने के बाद भी तालिबान की हालत कंगाल जैसी है। इससे पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में था। तब अफगान करेंसी काफी शक्तिशाली थी लेकिन पाकिस्तान के इस कदम से पाकिस्तानी करेंसी का अफगान व्यापारियों और व्यापारिक समुदाय पर एक तरह से कब्जा हो जाएगा।

पाकिस्तान अफगान अर्थव्यवस्था में एंट्री करने के लिए पहले से ही कोशिश कर रहा था। अब पाकिस्तानी करेंसी की शुरुआत के बाद जाहिर तौर पर अफगान करेंसी का मूल्य गिर जाएगा। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में अफरा-तफरी और अस्थिरता का माहौल है। नई तालिबानी सरकार को तो किसी भी कीमत पर आर्थिक मंदी से बचना है। शायद इसलिए तालिबान इस फैसले को मंजूर कर सकता है। अफगानिस्तान के बजट का 80 फीसदी इंटरनेशनल समुदाय से आता है जो बंद हो चुकी है। जिसकी वजह से हाल के महीनों में एक लंबे समय से चल रहा आर्थिक संकट और बढ़ गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के दौरान और अधिक दबाव में आ सकती है और उसे 2021-22 में 12 से 17 अरब डॉलर के चालू खाता घाटा का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के भुगतान संकट के गंभीर होने की आशंका है। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के दौरान भुगतान संतुलन के बढ़ते संकट के कारण दबाव में रहेगी। देश को 2021-22 के लिए 12 अरब अमेरिकी डॉलर से 17 अरब अमेरिकी डॉलर के चालू खाते के घाटे का सामना करना पड़ सकता है। यह बात यदि सही साबित होती है तो यह प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा आर्थिक नीतियों के मोर्चे पर किए गए सभी कामों को शून्य कर देगा।

 

 

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