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लेख - September 12, 2022

भारत “छोड़ो से जोड़ो” तक कांग्रेस…।

-ओम प्रकाश मेहता-

-: ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस :-

भारत की सबसे वयोवृद्ध राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का जोड़-तोड़-फोड़ और छोड़ से काफी निकट का संबंध रहा है भारत को अंग्रेजी सरकार से मुक्ति दिलाने में जहां इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, वहीं भारत को छोड़कर पाकिस्तान के निर्माण की भी यही जिम्मेदार रही और इन सभी महत्वपूर्ण घटनाओं में नेहरू परिवार का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा, पंडित मोतीलाल नेहरू से लेकर उनकी चौथी पीढ़ी राहुल तक इन कार्यों में संलग्न रहे हैं आज जो राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा शुरू की है वह भी नेहरू परिवार की इसी श्रृंखला की एक कड़ी है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म भी पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्म के समय ही हुआ था, सर ए ओ ह्यूम द्वारा स्थापित इस राजनीतिक दल का मूल उद्देश्य राजनीतिक नहीं बल्कि देश को आजाद कराने का सामाजिक था,इसलिए पार्टी ने देश को अंग्रेज राज से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई तथा बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के नेताओं ने अपने आप को तन-मन-धन सेआत्मसमर्पित किया और सभी के त्याग व बलिदान की बदौलत अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा, इसके लिए 1942 में जबरदस्त भारत छोड़ो आंदोलन भी चलाया गया और 5 साल के सर्वोच्च त्याग व बलिदान पूर्ण आंदोलन के बाद देश को आजादी मिली।
आजादी मिलने के तत्काल बाद भारत के इन भाग्यविधाताओं को देश के टुकड़े करने को मजबूर होना पड़ा जिसकी शुरुआत पाकिस्तान के बनने से हुई बाद में बांग्लादेश,म्यांमारजैसे देशों का जन्म भी भारत को विभाजित कर हुआ। इसी संदर्भ में आज राहुल गांधी को भारत जोड़ो यात्रा पर देश पर राज कर रही भारतीय जनता पार्टी व्यंग कर रही है कि यदि भारत छोड़ो आंदोलन या यात्रा को सही अर्थों में चलाना ही है तो पाकिस्तान या बांग्लादेश में चलाया जाना चाहिए तथा भारत से अलग हुए इन भू भागो को वापस भारत के साथ जोड़ा जाना चाहिए। जिससे कि राहुल के परनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई गलती को सुधारा जा सके। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने आज अपने पिता स्वर्गीय राजीव गांधी के समाधि स्थल पेरंबदूर से कन्याकुमारी तथा वहां से श्रीनगर तक की 4 माह की भारत जोड़ो यात्रा प्रारंभ की है जो 4 महीनों में पूरी होगी। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यात्रा में शामिल है।
यद्यपि भारत छोड़ो यात्रा के राजनीतिक उद्देश्य तो काफी बनाए जा रहे हैं, जैसे व्यापक जनसंपर्क व आम लोगों की समस्याओं से अवगत होने जैसे हैं,किंतु इस यात्रा का मूल उद्देश्य दिनों दिन अपनी मृत्यु के मुख की ओर अग्रेषित कांग्रेसमें नई जान फूंकना है। इस यात्रा के माध्यम से जहां राहुल गांधी अपने आप को कांग्रेसका सर्वे सर्वानेता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ा है, राजनीति में परिवारवाद का दाग लगाने वालों को भी यह बताना चाहते हैं कि आज भी कांग्रेस जो कुछ है वह गांधी परिवार के कारण ही है। अब अपनी इस यात्रा के माध्यम से राहुल जी अपने इस उद्देश्य में कहां तक सफल होते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में है किंतु इस यात्रा से कांग्रेस से भाग दौड़ कितनी रुक पाएगी? इसमें आशंका अवश्य दिखाई देती है, वैसे राहुल की इस यात्रा को गहन “चिकित्सा इकाई” (आईसीयू) में पड़ी अंतिम सांस की बाट जोहती कांग्रेस को “प्राणवायु” अवश्य मिल सकती है।
यहां यह स्मरण करना भी समीचीन होगा कि भारत की आजादी हासिल होने के बाद महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से कहा था कि कांग्रेस का मूल उद्देश्य पूरा हो चुका है इसलिए अब इस पार्टी को खत्म कर देना चाहिए किन्तुपंडित नेहरूने राष्ट्रपति के इस परामर्श को मान्य नहीं किया और इसी के झंडे तले जवाहरलाल वह उनकी बेटी ने 17 सत्रह साल देश पर राज किया और आज उन्हीं के वंशज राहुल जी गांधी जी के परामर्श को फलीभूत करने में जुटे हैं और लगता है कि वे इसमें पूर्णता: सफलता भी प्राप्त कर लेंगे और उनके विरोधी पिछले 8 सालों से नेहरू इंदिरा को हीकोस कोसकर उनके कार्यकाल के कीर्तिमान को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर आज देश का राजनीतिक माहौल एक अजीब दौर से गुजर रहा है, जो सत्ता में है वह’दीर्घ जीवी’होना चाहते हैं और जो सत्ता से बाहर है वह ‘आत्महत्या’ के रास्ते पर हैं, अब ऐसे में देश का भगवान ही मालिक है?

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