Home देश-दुनिया अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिये कूटनीतिक झटका: जयराम रमेश

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिये कूटनीतिक झटका: जयराम रमेश

नई दिल्ली, 24 मार्च (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है जो भारत के लिए एक गंभीर झटका है। श्री रमेश ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच इस्तेमाल किए जा रहे मध्यस्थों में से एक के रूप में पहचाना है। यदि ये रिपोर्ट सच हैं, तो वे भारत के लिए एक गंभीर झटका और तिरस्कार का प्रतिनिधित्व करती हैं – और यह सब स्वयं को घोषित करने वाले ‘विश्वगुरु’ के कारण है।” श्री रमेश ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की “निस्संदेह सैन्य सफलताओं” के बावजूद पाकिस्तान ने पिछले एक साल में कूटनीतिक रूप से नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “दुखद वास्तविकता यह है कि उसके बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक जुड़ाव और विमर्श प्रबंधन मोदी सरकार की तुलना में काफी बेहतर रहा है।” उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद, जो कभी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था, अब फिर से प्रासंगिक हो गया है।

कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विकसित होते संबंधों की ओर भी इशारा किया और आरोप लगाया कि इसने इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि श्री ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को “गर्मजोशी से और बार-बार गले लगाया” था और कई मौकों पर असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की, जिसमें उन्होंने एक “अभूतपूर्व दोपहर के भोजन” का भी उल्लेख किया। श्री रमेश ने कहा कि “पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी घेरे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिये हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए श्री रमेश ने उनकी हालिया कूटनीतिक पहुंच की आलोचना की, विशेष रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों से ठीक पहले की गई इजरायल यात्रा को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा , “श्री मोदी की इजरायल की अनुचित यात्रा, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अकारण हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी विकल्प के रूप में दर्ज की जाएगी।” उन्होंने तर्क दिया कि इस यात्रा ने इस क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को कमजोर कर दिया है। mउन्होंने सरकार की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण की आलोचना तेज करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री की गले मिलने वाली कूटनीति की पोल बुरी तरह खुल गई है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।” ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने पारंपरिक रूप से इजरायल, ईरान और प्रमुख अरब देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में संतुलित संबंध बना रखे थे ओर अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों में खुद को एक संभावित सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है।

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