जी-20 का ‘कमल’
-: ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस :-
कांग्रेस की सोच, दृष्टि और सियासत बेहद संकीर्ण हो गई है। उसकी सुई आज भी देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर अटकी है। नेहरू को ही देश की आन, बान, शान और भारत-निर्माता माना जाता रहा है। यकीनन नेहरू के हिस्से कई उपलब्धियां दर्ज हैं, लेकिन भारत जी-7, जी-20 देशों के समूह-संगठन का हिस्सा होने का सपना भी नहीं देख पाया था, जी-20 के शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करना तो बहुत दूर की कौड़ी थी। भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक हैसियत भी इतनी नहीं थी कि हम दुनिया के विकसित और सर्वसम्पन्न देशों की जमात में खड़े हो पाते। हम तो शेष विश्व के लिए ‘तीसरी दुनिया’ थे। आज़ादी के 75 साल बाद ‘अमृत-काल’ के दौर तक भारत का सर्वांगीण विकास हुआ है। हम आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था हैं। बेशक इसमें कांग्रेस सरकारों के 55 साल से अधिक कार्यकालों की हिस्सेदारी और उपादेयता भी है। कांग्रेस यह यथार्थ क्यों नहीं समझती? उसकी राजनीति और नफरत सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा (संघ परिवार समेत) तक ही क्यों सिमटी है? इससे कांग्रेस को क्या राजनीतिक और सामाजिक हासिल हो रहे हैं? कोई भी राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रीय संदर्भ, राष्ट्रीय पहचान या राष्ट्रीय उपमाएं ‘भाजपाई’ कैसे हो सकती हैं? वे भाजपा की बपौती या उसके कॉपीराइट की परिधियों में नहीं हैं, फिर भी कांग्रेस कपड़े फाडऩे में लगी है। आखिर जी-20 का भी ‘भगवाकरण’ कैसे किया जा सकता है? क्या इतनी हैसियत भारत और उसके प्रधानमंत्री की है?
जी-20 समूह-संगठन में अमरीका, ऑस्टे्रलिया, ब्राजील, कनाड़ा, जापान, इटली, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, रूस सरीखे समृद्ध और ताकतवर देश शामिल हैं। फिर भी अध्यक्षता भारत के हिस्से आई है। क्या यह गौरव, प्रतिष्ठा और भारतीयता का सम्मान नहीं है? कांग्रेस को इसमें भागीदार बनकर भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीयता का उदाहरण पेश करना चाहिए था, लेकिन उसने जी-20 के प्रतीक-चिह्न पर आपत्ति की है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के चुनाव चिह्न ‘कमल’ का प्रयोग किया है। दरअसल ‘कमल’ तब से भारत का ‘राष्ट्रीय पुष्प’ है, जब भाजपा तो क्या, जनसंघ का भी जन्म नहीं हुआ था। सनातन धर्म की मान्यतानुसार ‘कमल’ पर देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती विराजती हैं। यानी ‘कमल’ बौद्धिकता, विवेक के साथ-साथ धन-संपदा का भी प्रतीक-पुष्प है। उसे महज भगवा या भाजपाई करार देकर कांग्रेस ने हमारे सनातन धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान किया है। ‘कमल’ के बजाय कांग्रेस को व्यापक संदर्भों में सोचना चाहिए कि भारत को जी-20 से जुडक़र क्या अंतरराष्ट्रीय फायदे हो सकते हैं। जी-20 के देश विश्व का 70 फीसदी से ज्यादा कारोबार कर रहे हैं। विश्व का 85 फीसदी जीडीपी इन देशों का है। इन देशों में दुनिया की दो-तिहाई से ज्यादा आबादी बसती है। जी-20 देशों के पास दुनिया के समुद्र तट का 45 फीसदी और इसके विशेष आर्थिक क्षेत्रों का 21 फीसदी हिस्सा है। भारत को जी-20 की अध्यक्षता तब मिली है, जब वह कोरोना महामारी के बावजूद 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। भारतीयों के ज्ञान, अनुसंधान, उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी को आगे बढऩे के मौके मिलेंगे।
भारत दुनिया के सबसे बड़े ‘डिजिटल लोकतंत्र’ के तौर पर उभरा है। यह भुगतान 2026 तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, लिहाजा अर्थव्यवस्था 2030 तक 800 अरब डॉलर को पार कर सकती है। कांग्रेस को भारत की ऐसी वास्तविक आर्थिक शक्ति पर सोचना चाहिए। विपक्ष के मायने ये नहीं हैं कि आप हर समय सरकार को गालियां देते रहें। उसकी नीतियों की आलोचना की जानी चाहिए, ताकि गलती की गुंज़ाइश न्यूनतम हो, लेकिन जी-20 जैसा अंतरराष्ट्रीय संदर्भ हो, तो भारत का एक ही चेहरा दुनिया के सामने आना चाहिए। यह सोच बेहद संकरी है कि प्रधानमंत्री मोदी जी-20 के प्रतीक चिह्न के जरिए अपनी पार्टी का प्रचार करेंगे।
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