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लेख - November 11, 2022

सांसद संजय राउत की 102 दिन बाद अवैध गिरफ्तारी से रिहाई

-सनत जैन-

-: ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस :-

मुंबई सेशन कोर्ट के अधीन पीएमएलए की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को सांसद संजय राउत और प्रवीण राउत को रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा, संजय राउत की गिरफ्तारी अवैध तरीके से की गई है। ईडी के अधिकारियों ने भेदभाव किया है। सिविल प्रकृति के मामले को जानबूझकर मनी लांड्रिंग का मामला बनाने का प्रयास किया है। अदालत ने जांच एजेंसी को गिरफ्तार करने की शक्ति का सोच समझकर इस्तेमाल करने की हिदायत दी। विशेष न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में अपील कर रिहाई रोकने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट की न्यायाधीश भारती डोंगरे ने ईडी के अधिकारियों से कहा, कि वह गुरुवार को मामले की सुनवाई करेंगी। विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में माना कि जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने अवैध रूप से गिरफ्तारियां की थी। उल्लेखनीय है, ट्रायल कोर्ट ने लगभग 1 महीने तक इस मामले की लगातार सुनवाई कर यह फैसला सुनाया।
भारत में जांच एजेंसियां किस तरीके से काम कर रही हैं। यह उसका एक बड़ा उदाहरण है। ऐसा ही एक उदाहरण उ.प्र. के डॉक्टर अकील खान के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने आया था। जांच अधिकारियों ने अवैध तरीके से डॉक्टर खान की गिरफ्तारी एनएसए में की थी। उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस मामले में कड़ी टिप्पणी की थी। लेकिन इसके बाद भी जांच एजेंसियों के कामकाज करने के तरीके में कोई परिवर्तन नहीं आया। अब तो सांसद और मंत्रियों को जिस तरीके से जेल में ईडी द्वारा डाला जा रहा है। उनके खिलाफ सबूत गिरफ्तारी के बाद एकत्रित करने के प्रयास किए जाते हैं। सबूत नहीं होने पर भी उन्हें महीनों जेलों में रखा जाता है। एक तरह से आरो‎पियों की सामाजिक और राजनीतिक हत्या कर दी जाती है। अपराधिक मामलों में आरोपी बनाकर उनकी स्वतंत्रता और मौ‎लिक अ‎धिकारों को खत्म किया जा रहा है। इसको लेकर मुंबई की ‎विशेष न्यायालय ने बड़ी तीव्र टिप्पणी जांच एजेंसियों के बारे में की है।
देश में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसमें विपक्ष के ऊपर लगातार जांच एजेंसियां इसी तरीके की कार्यवाही कर रही हैं। आयकर प्रवर्तन निदेशालय को मनी लांड्रिंग के मामले में विशेष अधिकार मिले हुए हैं। इन विशेष अधिकारों के कारण केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय की जांच एजेंसियां अपने अधिकारों का खुलेआम दुरुपयोग कर रही हैं। विपक्षियों और उनसे जुड़े लोगों के ऊपर लगातार कार्यवाही की जा रही है। इससे जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता तेजी के साथ घटी है। जिस तरीके से पिछले कुछ महीनों में ईडी, सीबीआई एवं नारकोटिक्स की जांच एजेंसियों ने सारे देश में भय का एक वातावरण बना दिया है। ईडी की कार्यवाही को लेकर देशभर में आलोचनाएं हो रही हैं। हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री को भी ईडी ने समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी म‎ल्लिकार्जुन खड़गे से नेशनल हेराल्ड वाले मामले में कई घंटों तक कई बार पूछताछ करने के बाद केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय का डर और भय आम आदमी तक फैल गया है। जब देश के इतने बड़े-बड़े नेता और संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोग अवैध गिरफ्तारी और जांच एजें‎सियों के शिकार हो रहे हैं। इसका लाभ सत्तारूढ़ दल को मिलता है। इससे जांच एजेंसियों की निष्पक्षता खत्म हो रही है।
लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर अब लोगों ने भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है। अति सर्वत्र वर्जिते का यह ज्ञान हमें पुरखों से मिला हुआ है। अति इतनी ज्यादा हो गई है कि अब लोगों के सामने विरोध करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा। महंगाई, बेरोजगारी से आम आदमी को अपना जीवन जीने में कठिनाई आ रही है। उस पर सरकार का जो असंवेदनशीलता का रुख बना हुआ है। तरह-तरह से नियम कायदे के मकड़जाल में फंसने से आम आदमी का जीवन दूभर हो गया है। यह बगावत की स्थिति है। झारखंड के मुख्यमंत्री ने गिरफ्तारी की चुनौती देकर एक तरह से व्यवस्था के खिलाफ बगावत के स्वर तेज किए थे। जिस तरह से विशेष अदालत और मुंबई हाई कोर्ट का निर्णय आया है। नारकोटिक्स के मामले में भी मुंबई हाई कोर्ट नारकोटिक्स विभाग की कार्यवाही को लेकर नाराजगी जता चुकी है। उसके बाद भी यदि स्थिति नियंत्रित नहीं हो रही है, तो आगे चलकर इसके भयावह परिणाम सामने देखने को ‎मिलेंगे।

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