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लेख - April 28, 2022

योगी ने मंदिर और मस्जिद से लाउडस्पीकर कैसे हटवाए

-रजत शर्मा-

-: ऐजेंसी अशोक एक्सप्रेस :-

एक ऐसे समय में जब महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने के बावजूद यह तय नहीं कर पा रही है कि एमएनएस सुप्रीमो राज ठाकरे द्वारा उठाए गए लाउडस्पीकर के मुद्दे से कैसे निपटा जाए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक रास्ता दिखाया है।

मस्जिदों में अजान और मंदिरों समेत अन्य धार्मिक स्थलों में भजन के लिए लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ने सोमवार को 30 अप्रैल की समय सीमा देते हुए एक आदेश जारी किया कि धार्मिक स्थलों से सभी अवैध लाउडस्पीकरों को हटाया जाए। सरकार के इस आदेश ने अपना काम कर दिया। ऐसी खबरें हैं कि मस्जिदों के इमामों और मंदिरों के पुजारियों ने खुद ही लाउडस्पीकर हटाने शुरू कर दिए हैं।

यह आदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के 5 दिन बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन धार्मिक स्थलों पर पहले से ही लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल की इजाजत है, वहां इनका इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी आवाज परिसर से बाहर न जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अब नए स्थानों पर लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में सभी पुलिस थानों को ऐसे सभी धार्मिक स्थलों की लिस्ट बनाने और 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। पुलिस को धार्मिक नेताओं के साथ बातचीत करके अवैध लाउडस्पीकरों को हटाने का निर्देश दिया गया है। इस का सकारात्मक असर हुआ। सोमवार तक यूपी के 38000 से ज्यादा मंदिरों और मस्जिदों में लाउडस्पीकर की आवाज तय सीमा पर कर दी गई। एक भी मामले में पुलिस ने जबरन लाउडस्पीकर नहीं हटवाया। बुधवार दोपहर तक अवैध तरीके से लगाए गए कुल 6031 लाउडस्पीकर हटा दिए गए, जबकि 29674 लाउडस्पीकरों की आवाज तय सीमा तक कर दी गई।

योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुआत खुद अपने मठ से की। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर के लाउडस्पीकर की आवाज सबसे पहले कम की गई। गोरखनाथ मंदिर में जो लाउडस्पीकर लगे हैं, जिन पर दिन में भजन चला करते थे, उन सभी का मुंह बाहर की तरफ से मोड़कर अंदर की तरफ कर दिया गया। आवाज दूर तक न जाए, किसी को परेशानी न हो, इसलिए आवाज का स्तर भी 45 डेसिबल से नीचे कर दिया गया। गोरखनाथ मंदिर के पास ही गोरखपुर की बड़ी मस्जिद भी है। योगी की इस पहल का असर मस्जिद पर भी पड़ा। मस्जिद के मौलवी ने भी प्रशासन की अपील पर लाउडस्पीकर की आवाज कम कर दी है।

योगी की पहल का असर यूपी के अन्य सभी धार्मिक स्थलों पर देखने को मिला, जहां मैनेजमेंट से जुड़े लोगों ने खुद ही लाउडस्पीकर की आवाज कम कर दी। कई मस्जिदों ने अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकरों को हटा दिया।

हमारी लखनऊ संवाददाता रुचि कुमार ने बताया कि यूपी में अब तक 778 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतारे गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 711 लखनऊ जोन में हैं। इसके अलावा आगरा जोन में 3, गौतम बुद्ध नगर जोन में 19, कानपुर जोन में 13, मेरठ जोन में 2, बरेली, प्रयागराज और वाराणसी जोन में एक-एक धार्मिक स्थल से लाउडस्पीकर उतारे गए हैं। इसी तरह यूपी में 21 हजार से ज्यादा जगहों पर लाउडस्पीकर की वॉल्यूम कम की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा 5469 धार्मिक स्थल बरेली जोन में हैं। इसके अलावा लखनऊ जोन में 4803, मेरठ जोन में 4711, गोरखपुर जोन में 2354 और प्रयागराज जोन में 1073 जगहों पर लाउडस्पीकर की वॉल्यूम कम की गई है।

पहले पुलिस ने मंदिर, मस्जिद और दूसरे दार्मिक स्थलों से जुड़े लोगों से बात की। उन्हें साउंड लिमिट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के बारे में बताया। अब प्रशासन की टीमें जाकर मुआयना कर रही हैं। धार्मिक स्थलों पर जाकर पुलिस ये चेक कर रही है कि वहां कितने लाउडस्पीकर लगे हैं, उनकी परमिशेबल लिमिट से ज्यादा तो नहीं है। जो लोग नियम तोड़ रह हैं उन्हें नोटिस दिया जा रहा है।

लखनऊ के कैसरबाग इलाके में स्थित रोशन अली मस्जिद में 4 लाउडस्पीकर लगे हुए थे। पुलिस की नोटिस के बाद 3 लाउडस्पीकर हटा दिए गए और चौथे की आवाज कम कर दी गई। मंदिर और मस्जिद से जुड़े लोगों को पुलिस आसान शब्दों में समझा रही है कि वे डेसिबल कैसे नाप सकते हैं और लाउडस्पीकर की आवाज तेज होने से क्या नुकसान हो सकते हैं। अधिकांश लोग इन बातों को समझ रहे हैं और लाउडस्पीकर की आवाज को उसी हिसाब से कम कर रहे हैं।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर मंगलवार को गाजियाबाद में मरकज मस्जिद पहुंचे और पाया कि वहां लगाए गए 4 लाउडस्पीकरों में से एक को हटा दिया गया है, 2 को बंद कर दिया गया है, और चौथे लाउडस्पीकर की आवाज को तय सीमा में करके उसका इस्तेमाल ‘अज़ान’ के लिए किया जा रहा है। गाजियाबाद के प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर के महंत ने चारों लाउडस्पीकर बंद कर दिए हैं। अब मंदिर में आरती के दौरान सिर्फ घंटा-घड़ियाल और शंख बजाए जा रहे हैं।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर ने नोएडा की जामा मस्जिद में इमाम से बात की। इमाम ने कहा कि लाउडस्पीकर का वॉल्यूम कम कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि रमजान और ईद के बाद लाउडस्पीकर का वॉल्यूम और कम कर दिया जाएगा। झांसी के बड़ा गांव में सबसे पहले मंदिर से लाउडस्पीकर उतारा गया और इसके बाद बगल की मस्जिद के इमाम ने भी अपना लाउडस्पीकर उतार लिया।

ध्यान देने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में किसी के साथ कोई जोर-जबरदस्ती नहीं की गई। ये दिशानिर्देश मस्जिदों और मंदिरों दोनों पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं। जब कोई सरकार निष्पक्ष तरीके से काम करती है, तो उसका सकारात्मक असर पड़ता है। प्रशासन में लोगों का भरोसा मजबूत होता है और वे सरकार के कदम का समर्थन करने के लिए खुद आगे आते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने मठ के लाउडस्पीकर की आवाज कम करके मिसाल पेश की। इसीलिए यूपी में मंदिर-मस्जिदों या दूसरे धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर उतारने का विरोध किसी ने नहीं किया। जहां सख्ती की जरूरत होती है, योगी वहां सख्ती करते हैं, अपराधी और माफियाओं के घरों पर बुलडोजर चलवाते हैं। और जहां प्यार से बात करके रास्ता निकालने की जरूरत होती है, वहां बात करते हैं, लाउडस्पीकर के मामले में उन्होंने यही किया।

बड़ी बात यह है कि योगी ने न तो अपराधियों के मामले में भेदभाव किया, न मंदिर और मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के मामले में। दूसरे राज्यों की सरकारों को इस मामले में योगी से सीखना चाहिए।

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