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लेख - May 23, 2022

जनता को राहत

-सिद्धार्थ शंकर-

-: ऐजेंसी अशोक एक्सप्रेस :-

महंगाई से जूझ रही जनता को राहत पहुंचाने केंद्र सरकार ने बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 8 रुपए और डीजल पर 6 रुपए घटा दिया गया है। इस कटौती के बाद आम आदमी को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली समेत देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो गए हैं। पेट्रोल पर 8 रुपए और डीजल पर 6 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद अब पेट्रोल पर 19.90 और डीजल पर 15.80 रुपए एक्साइज ड्यूटी चार्ज लगेगा। इससे पहले सरकार पेट्रोल पर 27.90 और डीजल पर 21.80 रुपए एक्साइज ड्यूटी के रूप में वसूल रही थी। केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब जनता की कमाई महंगाई की भेंट चढ़ती जा रही थी। जनता को महंगाई से निताज दिलाने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से वैट कम करने का आग्रह किया था, मगर एक भी राज्य ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लिहाजा महंगाई का ग्राफ बढ़ता जा रहा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने पहल करते हुए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला किया। हालांकि, केंद्र के ऐलान के ठीक बाद केरल ने और उसके बाद राजस्थान सरकार ने वैट कम करके अपने राज्य के लोगों को राहत दी। अब भी कई राज्यों ने केंद्र की तर्ज पर वैट कम करने का फैसला नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि उन पर अब वैट कम करने का दबाव है और जल्द ही इस दिशा में फैसला होगा। पेट्रोल और डीजल के दाम 110 रुपए से अधिक हो चुके थे। उधर डीजल के दाम बढऩे से मालभाड़ा भी बढऩे लगा था। इसका असर अनाज और सब्जियों पर दिख रहा था। कहा जा रहा था कि डीजल का रेट कम होने से माल भाड़ा कम होगा और इससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर ब्रेक लगेगा। अब ऐसा होने की उम्मीद प्रबल हो गई है। हालांकि, महंगाई से सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया जूझ रही है। निश्चित रूप से इसकी एक वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का महंगा होना है। मार्च में 30 फीसदी की रिकॉर्ड तेजी के बाद दाम घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से कुछ ऊपर स्थिर हुए हैं, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने की आशंका को देखते हुए अरब देश एक बार फिर दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। बता दें कि अब तक जिस भाव पर हम पेट्रोल और डीजल की खरीद करते रहे हैं, उनमें से टैक्स 46 फीसदी होता है। केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है तो राज्य सरकारें इसपर वैट और सेस यानी अतिरिक्त टैक्स लगाते हैं। यही वजह है कि देश अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल और डीजल के दामों में काफी अंतर होता है। आखिरी बार एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला तब किया गया था जब उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नजदीक थे। चुनाव परिणाम आते ही पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल भी भाजपा पर यही आरोप लगाते हैं कि मोदी सरकार चुनाव को देखकर फैसले लेती है। ऐसे में सवाल उठता है कि गुजरात और हिमाचल के विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने को हैं तो आखिर क्या वजह है कि केंद्र सरकार को यह फैसला रुस और यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक अस्थिरता के बीच लेना पड़ा? अप्रैल के थोक महंगाई दर के आंकड़ों ने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया। अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए अप्रैल में थोक महंगाई दर 15 फीसदी के पार पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में थोक महंगाई दर 15.08 फीसदी रही। जोकि पिछले तीन दशक में सबसे अधिक है। बता दें, अप्रैल 2021 से ही थोक महंगाई दर दहाई के पार बनी हुई है। शहरों के मुकाबले गांव के लोग महंगाई से अधिक परेशान हैं। आंकड़ों के अनुसार मार्च के महीने में गांव में खुदरा महंगाई दर 7.66 फीसदी थी। वहीं, अप्रैल के महीने में यह बढ़कर 8.38 फीसदी हो गई, जबकि एक साल पहले अप्रैल के महीने में गांवों में महंगाई दर 3.75 फीसदी थी। यानी एक साल बाद मंहगाई दोगुना हो गई। शहरों में महंगाई दर अप्रैल 2022 में 7.09 फीसदी रही। जोकि गांवों की तुलना में अधिक है। रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया भर में खाद्य तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लेकिन इंडोनेशिया के सरकार द्वारा पॉम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद खाद्य तेल की कीमतों में और इजाफा देखने को मिला। हालांकि अब यह प्रतिबंध वहां के सरकार द्वारा हटा लिया गया है। जिसके बाद उम्मीद है कि खाद्य तेल की कीमतों में कटौती देखने को मिलेगी।

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