Home देश-दुनिया भारत की समृद्धि, संपन्नता की इबारत लिखी जाएगी अमृतकाल में : मोदी (अपडेट)

भारत की समृद्धि, संपन्नता की इबारत लिखी जाएगी अमृतकाल में : मोदी (अपडेट)

टोक्यो/नई दिल्ली, 23 मई (ऐजेंसी/अशोक एक्सप्रेस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि आजादी के अमृतकाल में भारत की समृद्धि एवं संपन्नता की ऐसी इबारत लिखी जा रही है जिसे मिटाना असंभव होगा।
जापान की यात्रा पर आये प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज शाम यहां प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जब अपने ऐतिहासिक संबोधन के लिए शिकागो जा रहे थे, तो उससे पहले वो जापान भी आए थे। जापान ने उनके मन-मस्तिष्क पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा था। जापान के लोगों की देशभक्ति, जापान के लोगों का आत्मविश्वास, स्वच्छता के लिए जापान के लोगों की जागरूकता, उन्होंने इसकी खुलकर प्रशंसा की थी। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भी जापान को प्राचीन एवं आधुनिक राष्ट्र बताया था और कमल दल के रूप में निरुपित किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान स्वाभाविक साझीदार हैं। भारत की विकास यात्रा में जापान की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। जापान से हमारा रिश्ता आत्मीयता का है, आध्यात्म का है, सहयोग का है, अपनेपन का है।
जापान से हमारा रिश्ता सामर्थ्य का है, सम्मान का है, विश्व के लिए साझे संकल्प का है। जापान से हमारा रिश्ता बुद्ध का है, बोध का है, ज्ञान का है, ध्यान का है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत जापान के सांस्कृतिक संबंध उसी तरह से जीवंत हैं।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को भगवान बुद्ध के विचारों पर, उनके बताए रास्ते पर चलने की बहुत ज़रूरत है। यही रास्ता है जो आज दुनिया की हर चुनौती, चाहे वो हिंसा हो, अराजकता हो, आतंकवाद हो, जलवायु परिवर्तन हो, इन सबसे मानवता को बचाने का यही मार्ग है। उन्होंने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसे भगवान बुद्ध का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिला। भारत उनके बताये मार्ग पर चलते हुए मानवता की सेवा कर रहा है। चाहे कितनी बड़ी चुनौती हो, भारत समाधान देता है।
उन्होंने कहा कि सदी के सबसे बड़े कोरोना के संकट में जब किसी को रास्ता नहीं सूझ रहा था तब अनिश्चितता केे बीच भारत ने दुनिया को दवाएं दीं। जब वैक्सीन्स उपलब्ध हुईं तब भारत ने ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन्स अपने करोड़ों नागरिकों को भी लगाईं और दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी भेजीं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए अभूतपूर्व निवेश कर रहा है। लाखों वेलनेस सेंटर बनाये जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की आशा बहनों को महानिदेशक के वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व अवॉर्ड से सम्मानित किया है। भारत की लाखों आशा बहनें, मैटेरनल केयर से लेकर वैक्सीनेशन तक, पोषण से लेकर स्वच्छता तक, देश के स्वास्थ्य अभियान को गति दे रही हैं।
श्री मोदी ने कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन और तापवृद्धि की चुनौती से निपटने के लिए 2070 तक जेटजीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दशक के अंत तक इलैक्ट्रिक, ग्रीन हाइड्रोजन आदि की क्षमता बढ़ा कर कुल ईंधन खपत का 50 प्रतिशत इन स्वच्छ ऊर्जा माध्यमों पर आधारित करने का भी संकल्प है। हम दो साल में पूरी आपूर्ति श्रृंखला को हुए आर्थिक नुकसान को देखते हुए, यह चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति ना बने। इसके लिए वैश्विक स्थिर आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी इस क्षमता के निर्माण में जापान एक अहम भागीदार है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल हो, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर हो, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर हो, ये भारत-जापान के सहयोग के बहुत बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि हमने भारत में एक मजबूत और टिकाऊ, जिम्मेदार लोकतंत्र की पहचान बनाई है। उसको बीते 8 साल में हमने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाया है। हर चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हो रहा है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं मतदान कर रहीं हैं। लोकतंत्र भारत की आकांक्षाओं काे नया आयाम दे रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से कोरोना कालखंड में भारत के सुदूर क्षेत्रों में लोगों के हकों की रक्षा हुई। तकनीक के कारण के भारत का बैंकिंग सिस्टम चलता रहा। भारत डिजीटल नेटवर्क में बड़ी ताकत बन गया है। पूरे विश्व में डिजीटल भुगतान का 40 प्रतिशत केवल भारत में हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में आज सही मायने में जनता के नेतृत्व वाली सरकार काम कर रही है। शासन का यही मॉडल, डिलिवरी को दक्ष बना रहा है। यही लोकतंत्र पर निरंतर मज़बूत होते विश्वास का सबसे बड़ा कारण है।
श्री मोदी ने कहा, “आजादी के अमृतकाल में भारत की समृद्धि और सम्पन्नता का नया इतिहास लिखने वाला है। हमने जो संकल्प लिये हैं, वे बड़े हैं। मुझे जो संस्कार मिला है और जिन लाेगों ने मुझे गढ़ा है, मुझे मक्खन पर लकीर करने में मज़ा नहीं आता है, मैं पत्थर में लकीर करता हूं।”
उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति और अपनी संस्थाओं के खोए हुए विश्वास को पुन: प्राप्त कर रहा है। योग, आयुर्वेद, पांरपरिक चिकित्सा, मसाले, हल्दी की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। खादी कभी नेताओं की पोशाक मानी जाती थी और आज इसकी दुनिया भर में मांग है। आज का भारत अपने अतीत को लेकर जितना गौरवान्वित है, उतना ही तकनीक-नीत, विज्ञान-नीत, नवान्वेषण-नीत, प्रतिभा-नीत भविष्य को लेकर भी आशावान है।
श्री मोदी ने कहा, “जापान से प्रभावित होकर स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि हर भारतीय नौजवान को अपने जीवन में कम से कम एक बार जापान की यात्रा ज़रूर करनी चाहिए। मैं स्वामी जी की इस सद्भावना को आगे बढ़ाते हुए, मैं चाहूंगा कि जापान का हर युवा अपने जीवन में कम से कम एक बार भारत की यात्रा करे।” उन्होंने कहा कि प्रवासी समुदाय के लोगों ने अपने कौशल, प्रतिभा एवं उद्यमशीलता से जापान की धरती को मंत्रमुग्ध किया था। आज आस्था से लेकर एडवेंचर तक भारत, जापान के लिए एक स्वाभाविक पर्यटन आकर्षण है। उन्होंने अपील की, “आप जापान के लोगों से भारत को देखने और भारत से जुड़ने का आग्रह करें। आपके सार्थक प्रयास से भारत जापान संबंधों को अद्भुत बुलंदियों तक पहुंचाया जा सकता है। ”

 

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