Home देश-दुनिया “राष्ट्र टाइम्स” की 45वीं वर्षगांठ पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमेश पंडित को शॉल, प्रतीक चिन्ह व स्मारिका भेंट कर किया गया सम्मानित

“राष्ट्र टाइम्स” की 45वीं वर्षगांठ पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमेश पंडित को शॉल, प्रतीक चिन्ह व स्मारिका भेंट कर किया गया सम्मानित

नई दिल्ली | (साहिल गौड़ )पत्रकारिता की निडर, निष्पक्ष और जनपक्षीय परंपरा को समर्पित 45 वर्ष
राजधानी के प्रतिष्ठित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में “राष्ट्र टाइम्स” की 45वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित विशेष स्मारिका का लोकार्पण किया गया। यह आयोजन मात्र एक समाचार पत्र की वर्षगांठ नहीं, बल्कि सच्ची पत्रकारिता के प्रति समर्पण, ईमानदारी और जनसरोकारों को समर्पित भावनाओं का उत्सव था।
इस अवसर पर राष्ट्र टाइम्स के प्रधान संपादक विजय शंकर चतुर्वेदी ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमेश पंडित को शॉल, प्रतीक चिन्ह और विशेष रूप से प्रकाशित स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान उस पत्रकारिता को समर्पित था, जो सत्ता से नहीं, सत्य से संचालित होती है — और उन जननेताओं को जो समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज़ बनते हैं। इस अवसर पर उमेश पंडित ने कहा:
राष्ट्र टाइम्स सिर्फ एक अख़बार नहीं है, यह एक विचार है — विचार सच्चाई का, विचार प्रतिबद्धता का। विजय शंकर चतुर्वेदी ने बीते चार दशकों में पत्रकारिता को न तो बाज़ार के आगे झुकने दिया और न ही सत्ता की चमक से भ्रमित होने दिया। उन्होंने हर बार समाज की ज़मीनी सच्चाइयों को प्राथमिकता दी, और वंचितों, मज़दूरों, किसानों और युवाओं की आवाज़ को बुलंदी दी।”
उन्होंने आगे कहा: आज जब पत्रकारिता कॉरपोरेट व राजनैतिक दबावों से जूझ रही है, ऐसे समय में राष्ट्र टाइम्स जैसी संस्थाएं लोकतंत्र की उम्मीद बनकर उभरती हैं। यह वही मंच है जो उन सवालों को उठाता है, जिन्हें अन्य मुख्यधारा मीडिया अक्सर दरकिनार कर देते हैं।”
इस अवसर पर जारी विशेष स्मारिका में राष्ट्र टाइम्स की पत्रकारिता यात्रा के स्वर्णिम पलों को सहेजा गया है — जिसमें शामिल हैं:
बीते 45 वर्षों के चुनिंदा संपादकीय लेख,राजनीतिक-सामाजिक विश्लेषण,दुर्लभ फोटोग्राफ्स तथा पत्रकारिता के बदलते दौर में अख़बार की भूमिका पर आलेख।
उमेश पंडित ने अंत में राष्ट्र टाइम्स के योगदान की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि मैं विजय शंकर चतुर्वेदी को बधाई देता हूं कि उन्होंने पत्रकारिता के मूल्यों, संवेदना और सच्चाई को जीवित रखा है। उनकी लेखनी और अखबार, दोनों ही जनता के प्रति जवाबदेह रहे हैं — यही पत्रकारिता की असली पहचान है।”

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