पेट्रोल पर केंद्र का बड़ा निर्णय: 30% तक इथेनॉल मिश्रण पर एक्साइज ड्यूटी शून्य
-आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की पहल
नई दिल्ली, 11 जून (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 22 से 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E22 से E30) पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क पूरी तरह से हटाकर शून्य कर दिया गया है। यह छूट भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किए गए ईंधन पर प्रभावी होगी, जिससे भविष्य में उपभोक्ताओं को स्वच्छ और किफायती ईंधन मिल सकेगा।
विदेशी मुद्रा और किसानों को लाभ
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना रहता है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित बायोफ्यूल को प्राथमिकता देना है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों से तैयार होता है, इसलिए इस निर्णय से न केवल तेल आयात का खर्च घटेगा, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बायोफ्यूल में भारत की बड़ी प्रगति
भारत ने बायोफ्यूल क्रांति की दिशा में तीव्र गति से सफलता प्राप्त की है। वर्ष 2014 में जहाँ इथेनॉल मिश्रण मात्र 1.5 प्रतिशत था, वहीं सरकार ने 20 प्रतिशत मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही 2024 में हासिल कर लिया है। अब फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों और E85 जैसे उन्नत ईंधन की दिशा में बढ़ते कदम भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील राष्ट्र बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
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