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लेख - September 13, 2021

आरएसएस की सोच तालिबानी है या इस तरह की बात करने वाले अज्ञानी हैं?

दृनीरज कुमार दुबे-

-: ऐजेंसी अशोक एक्सप्रेस :-

देश में एक चलन बन गया है कि जब भी तथाकथित बुद्धिजीवियों या राजनीतिक दलों के नेताओं को लगे कि मीडिया की सुर्खियों में आना है या अपने नेतृत्व की नजर में जगह बनानी है तो सबसे आसान काम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला बोल दो। दुनिया के सबसे अनुशासित और देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना कभी राहुल गांधी अरब जगत के इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से करते हैं तो कभी जावेद अख्तर जैसे कथित बुद्धिजीवी संघ की सोच और विचारधारा पर सवाल उठाते हुए उसको तालिबानी करार देते हैं। कभी आजादी के आंदोलन में संघ के योगदान पर सवाल उठाये जाते हैं तो कभी आरएसएस की विचारधारा पर हमला बोला जाता है। लेकिन इन सब हमलों से बेपरवाह संघ राष्ट्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण के कार्यों में सतत लगा हुआ है। आलोचनाएं या हमले संघ कार्य को ना कभी प्रभावित कर पाये ना कर पायेंगे क्योंकि संघ किसी सरकार या पार्टी से मिलने वाली मदद पर नहीं आत्मनिर्भर है। जो लोग भारत में संघ के कार्यों को लेकर शंका जाहिर करते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि संघ के आनुषांगिक संगठन दुनिया के कोने-कोने में फैले हैं और मानव सेवा के कार्य कर रहे हैं।

क्या कहा जावेद अख्तर ने?
जहां तक संघ पर हालिया हमले की बात है तो गीतकार जावेद अख्तर ने आरएसएस की तुलना तालिबान से करते हुए कहा है कि संघ परिवार और उसके आनुषांगिक संगठनों- विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल का भी उद्देश्य वही है जो तालिबान का है। अंग्रेजी समाचार चैनल एनडीटीवी से बातचीत में जावेद अख्तर ने दावा किया कि भारतीय संविधान आरएसएस के लक्ष्य की राह में आड़े आ रहा है लेकिन अगर मौका मिला तो यह लोग उस सीमा को पार कर जाएंगे। जावेद अख्तर का यह बयान निजी खुन्नस का एक स्वरूप ही प्रतीत होता है क्योंकि उनके कथन से स्पष्ट है कि पढ़ने-लिखने की आदत होने के बावजूद उन्होंने ना तो कभी संघ के बारे में पढ़ा है, ना ही आरएसएस नेताओं के विचार सुने हैं और ना ही कभी एक सामान्य स्वयंसेवक तक से बातचीत की है।

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा क्या है?
जावेद अख्तर अगर यह कह रहे हैं कि आरएसएस भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है तो उनकी समझ पर तरस आता है। दरअसल आरएसएस की हिंदू राष्ट्र संबंधी सोच को जो लोग ठीक से समझ नहीं पाते वही इस तरह की बचकाना टिप्पणी करते हैं। आरएसएस का मानना है कि राष्ट्र के वैभव और शांति के लिए काम कर रहे सभी भारतीय हिंदू हैं। जिन लोगों की भावना राष्ट्रवादी है और जो लोग भारत की संस्कृति तथा विरासत का सम्मान करते हैं वो सभी हिंदू हैं। आरएसएस का मानना है कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है चाहे वह किसी भी धर्म के हों। देखा जाये तो आरएसएस देश के सभी 135 करोड़ लोगों को हिंदू मानता है और जब भारत में सभी हिंदू हैं तो यह हिंदू राष्ट्र अपने आप ही हो गया। इसमें यह बात कहां से आई कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की साजिश चल रही है। साफ है कि ऐसी बातें सिर्फ भ्रम और डर का माहौल पैदा करने की मंशा रखने वाले लोग ही कहते हैं। हिंदुस्तान प्रथम, हिंदुस्तानी प्रथम के सिद्धांत पर कार्य करने वाले आरएसएस पर जो लोग समाज को बांटने का आरोप लगाते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बार-बार कहा है कि जो लोग मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए बोलते हैं वह हिंदू नहीं हो सकते। संघ प्रमुख ने यह भी कई बार कहा है कि लोगों में इस आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता कि उनके पूजा करने का तरीका क्या है। संघ के लिए भारतीय संविधान सर्वोच्च है और इसे वह पवित्र ग्रंथ के रूप में देखता है।

संघ के बारे में किये जाने वाले दुष्प्रचार
संघ के बारे में अनेकों प्रकार के दुष्प्रचार किये जाते हैं, जैसे जावेद अख्तर या राहुल गांधी आदि को सिर्फ विश्व हिन्दू परिषद या बजरंग दल ही क्यों दिखते हैं, संघ के आनुषांगिक संगठनों में तो मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और राष्ट्रीय सिख संगत भी हैं। राहुल गांधी कई बार यह भी कह देते हैं कि संघ महिला विरोधी है क्योंकि वहां महिलाओं को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता। उन्हें पता होना चाहिए कि राष्ट्रीय सेविका समिति और दुर्गा वाहिनी भी संघ के ही आनुषांगिक संगठन है और इन्हें महिलाएं ही चलाती हैं। कई लोग बीच-बीच में संघ के ध्वज पर भी सवाल उठा देते हैं और पूछते हैं कि तिरंगे की बजाय भगवा ध्वज क्यों? यह सवाल पूछने वालों को पहले यह समझना होगा कि संघ के लिए भी तिरंगा ही सबसे पहले है जहां तक बात भगवा ध्वज की है तो वह संघ के लिए गुरु समान है। यह सर्वविदित है कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार थे। जब डॉ. हेडगेवार से यह आग्रह किया गया कि संस्थापक होने के नाते वह ही संगठन के गुरु बनें तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक इंकार करते हुए हिंदू संस्कृति के प्रतीक भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया था।

संघ की भारत भक्ति
यही नहीं, आरएसएस की भारत भक्ति पर सवाल उठाते हुए उस पर तमाम तरह के आरोप लगा देना बड़ा आसान है लेकिन यह सबसे बड़ा सत्य और तथ्य है कि भारत में आरएसएस ही ऐसा संगठन है जो सिर्फ भारत माता की जय के नारे लगाता है और भारत माता का जयघोष चारों दिशाओं में गूँजता रहे इसके लिए निरन्तर कार्य करता है। किसी आपदा या संकट के समय आरएसएस के नेताओं को स्वयंसेवकों से मदद के लिए जुटने का आग्रह या आह्वान नहीं करना पड़ता बल्कि राहत कार्यों में सरकारी एजेंसियों से पहले स्वयंसेवक ही जुट जाते हैं।

संघ से ज्यादा योगदान किसी का नहीं
बहरहाल, संघ को समझना आसान भले नहीं हो लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। संघ पर किसी भी प्रकार का आरोप लगाने से पहले जरा संघ की शाखा में जाना शुरू कीजिये, आपकी राय अपने आप बदल जायेगी। संघ ने समय-समय पर अपने बारे में भ्रम दूर करने के लिए सर्वसमाज को आमंत्रित करते हुए सम्मेलनों का भी आयोजन किया है। कभी मौका लगे तो ऐसे सम्मेलनों का हिस्सा बनिये और अपने मन के और दूसरों के मन के भ्रम को भी दूर कीजिये। जहां तक संघ पर तालिबानी संगठन होने का आरोप लगाने की बात है तो संघ तालिबानी नहीं बलिदानी संगठन है और देश तथा समाज के लिए इसने अनेकों बलिदान किये हैं। आजादी के आंदोलन में भले संघ से ज्यादा किसी अन्य संगठन का योगदान रहा हो लेकिन आजाद भारत के निर्माण में संघ से ज्यादा योगदान किसी अन्य संगठन का नहीं है।

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