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लेख - December 16, 2022

पेसा एक्ट: जनजातीयों का संवैधानिक अधिकार

-निलय श्रीवास्तव-

-: ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस :-

मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की श्रृंखला में एक और कड़ी जनजातीय गौरव दिवस के रुप में जुड़ गयी है। इसी दिन मध्यप्रदेश में पेसा एक्ट लागू किया गया है। मध्यप्रदेश पेसा एक्ट कानून लागू करने वाला सातवां राज्य बन चुका है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश आंध्र प्रदेश तेलंगाना राजस्थान गुजरात और महाराष्ट्र ने ही अपने पेसा कानून बनाये हैं। पेसा अधिनियम में जनजातीय समाजों की ग्राम सभाओं को अत्यधिक ताकत दी गई है। संविधान के भाग 9 के पंचायतों से जुड़े प्रावधानों को जरूरी संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तारित करने का लक्ष्य है। गरीबी उन्मूलन और अन्य कार्यक्रमों के लिये लाभार्थियों को चिन्हित करने तथा चयन के लिये भी ग्राम सभा ही उत्तरदायी होगी। संविधान के भाग 9 के अंतर्गत जिन समुदायों के संबंध में आरक्षण के प्रावधान हैं उन्हें अनुसूचित क्षेत्रों में प्रत्येक पंचायत में उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही यह शर्त भी है कि अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण कुल स्थानों के 50 प्रतिशत से कम नहीं होगा तथा पंचायतों के सभी स्तरों पर अध्यक्षों के पद अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित रहेंगे। पेसा एक्ट कानून का उद्देश्य जनजातीय समाज को स्वशासन प्रदान करने के साथ ही ग्राम सभाओं को सभी गतिविधियों का मुख्य केन्द्र बनाया गया है। यहाँ बता दें कि देश में पेसा कानून 24 दिसम्बर 1996 को लागू हुआ था लेकिन देश में सबसे अधिक आदिवासियों के घर यानी मध्यप्रदेश में यह कानून लागू नहीं हो सका था। हांलाकि मध्यप्रदेश में लम्बे समय से पेसा एक्ट सभी प्रावधानों के साथ पूरी तरह लागू करने की मांग की जा रही थी।
पेसा कानून के जरिए ग्राम सभाओं को और अधिक अधिकार मिले हैं। गैर जनजातीय व्यक्ति या कोई भी अन्य व्यक्ति छल कपट से बहला फुसलाकर विवाह करके जनजातीय भाई-बहनों की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने या खरीदने की कोशिश करें तो ग्राम सभा इसमें हस्तक्षेप कर सकेगी। यदि ग्राम सभा को यह पता चलता है कि वह उस जमीन का कब्जा फिर से जनजातीय भाई-बहनों को दिलवाएगी। अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुशंसा के बिना खनिज के सर्वे पट्टा देने या नीलामी की कार्यवाही नहीं हो सकेगी। अब तेदुपत्ता तोड़ने और बेचने का अधिकार भी ग्राम सभाओं को दिया जाएगा। गांव में मनरेगा और अन्य कामों के लिए आने वाले धन से कौन सा काम किया जाएगा इसे पंचायत सचिव नहीं बल्कि ग्राम सभा तय करेगी। इसका मतलब है कि ग्राम सभा अपने क्षेत्र में स्वयं या एक समिति गठित कर वनोपजों जैसे अचार गुटली करंज बीज महुआलाखगोंद हर्रा बहेरा आंवला आदि का संग्रहण मार्केटिंग मूल्य तय करना और बिक्री कर सकेंगें। पेसा एक्ट के तहत् अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को स्वशासन की संस्थाओं के तौर पर कार्य करने के लायक बनाने के लिये अपेक्षित शक्तियाँ और अधिकार देते हुए राज्यों के विधानमंडल यह सुनिश्चित करेंगें कि ग्रामसभा और पंचायतें को निश्चित रूप से इस तरह शक्तियाँ प्रदान की गई हों जिनमें किसी भी मादक पदार्थ की बिक्री या उपभोग को प्रतिबंधित या नियमित या सीमित करने की शक्ति होगी एवं गौण वन उत्पादों का स्वामित्व मिलेगा। एक्ट में प्रावधान किया गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि के हस्तांतरण को रोकने की शक्ति और किसी अनुसूचित जनजाति की अवैध रूप से हस्तांतरित की गई भूमि को वापस लेने के लिये उचित कार्यवाही करने की शक्ति होगी। अब कोई भी नई शराबभांग की दुकान ग्रामसभा की अनुमति के बिना नहीं खुलेगी। यदि 45 दिन में ग्राम सभा कोई निर्णय नहीं करती है यह स्वमेव मान लिया जाएगा कि नई दुकान खोलने के लिए ग्रामसभा सहमत नहीं है और फिर दुकान नहीं खोली जाएगी। यदि कोई शराब या भांग की दुकान गांव के अस्पतालस्कूलधार्मिक स्थल आदि के आस-पास हो तो उसके स्थान परिवर्तन की अनुशंसा ग्रामसभा सरकार को भेज सकेगी। ग्राम सभा किसी स्थानीय त्योहार पर शराब दुकान बंद करने की अनुशंसाा कलेक्टर से कर सकती है। एक वर्ष में कलेक्टर चार शुष्क दिवस घोषित करने के लिए अधिकार के अंतर्गत दुकान को उस क्षेत्र के लिए बंद कर सकेंगे। नशे की लत को हतोत्साहित करने के लिए ग्रामसभा न केवल किसी सार्वजनिक स्थान पर शराब का उपयोग प्रतिबंधित कर सकती है बल्कि व्यक्तिगत रूप से उपयोग किए जाने वाले मादक द्रव्यों की सीमा भी कम कर सकती है। गांव में अवैध शराब के विक्रय को रोकने का काम भी ग्रामसभा द्वारा किया जाएगा।
पेसा एक्ट ग्राम पंचायतों को अत्यंत शक्तिशाली बनाकर उन्हें व्यापक अधिकार देता है। निश्चित रूप से इस एक्ट से आदिवासियों के जीवन में व्यापक बदलाव आयेगा। उन्हें खुद निर्णय लेने और अपना विकास करने के अवसर मिलेंगे। मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातियों के उत्थान की दिशा में जो सशक्त कदम उठाया है वह स्वागत करने योग्य है। शिक्षा स्वास्थ्य से लेकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तक की गारंटी खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी है।

 

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