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खड़गे की जनगणना शीघ्र करने की मांग

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (ऐजेंसी/अशोका एक्स्प्रेस)। राज्यसभा में विपक्ष की नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शीघ्र जनगणना करने की मांग करते हुए कहा है कि यह देश की आर्थिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।
श्री खडगे ने मंगलवार को सदन में “सभापति की अनुमति से उठाये गये मुद्दे ” के अंतर्गत कहा कि मौजूदा सरकार जनगणना करने में असाधारण देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना कराने का प्रावधान है लेकिन सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए जनगणना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनगणना करना बड़ा काम है और सरकार ने पर्याप्त आवंटन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना भी इसी के साथ कराई जानी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी के सुजीत कुमार ने कहा कि ऑटिज्म की समस्या पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। यह समाज में बहुत तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को विशेष सहायता की आवश्यकता होती है और सरकार को इसके लिए विशेष प्रावधान करने चाहिए। इसके संबंध में जागरूकता पैदा करने के लिए विशेष शिविर लगाने चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी के डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व शामिल करने की मांग की। उन्होंने विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है।
कांग्रेस के मुकुल बालकृष्ण वासनिक ने बोधगया में बौद्ध मंदिर के प्रबंधन में बदलाव की मांग की और कहा कि इसके लिए नया कानून लाया जाना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी के डॉक्टर के लक्ष्मण ने हैदराबाद विश्वविद्यालय से संबंधित भूमि को बेचने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय में हरित क्षेत्र को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि को बेचने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप करें।
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने न्यायपालिका में सुधार की मांग की। उन्होंने हाल में ही न्यायपालिका में कोई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनको देखते हुए पूरी न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। नियुक्ति प्रक्रिया और सेवानिवृत्ति तक पूरी प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पूरी न्यायपालिका को पारदर्शिता की आवश्यकता है। इसके लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेवामुक्त न्यायाधीशों को कम से कम दो वर्ष तक किसी राज्य या केंद्र सरकार में नियुक्ति नहीं देनी चाहिए।
कांग्रेस की रजनी पाटिल ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की और सरकार से इसमें उचित कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में मध्यम वर्ग और निम्नवर्ग के बच्चे जाते हैं। स्कूली शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं होने के कारण यह बच्चे अक्सर बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों की कमी है।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने समाज में बढ़ती घृणा का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि घृणा फैलाने वाले लोग बड़े लोगों में परिवर्तित होते जा रहे हैं। घृणा वाले भाषणों को रोकने के लिए बनाए गए नियामक कमजोर पड़ रहे हैं।‌ उन्होंने कहा कि इसके लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

 

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